Saturday, September 30, 2023
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Shani Jayanti 2023: ऐसे हुआ था शनिदेव का जन्म और इस कारण पिता सूर्य हुए थे नाराज

Shani Jayanti 2023:एक पौराणिक कथा के अनुसार शनिदेव का जन्म ऋषि कश्यप के अभिभावकत्व यज्ञ से हुआ था।

Shani Jayanti 2023: शनि महाराज को कर्म का देवता माना जाता है। इंसान को उसके कर्म के अनुसार शनिदेव दंड देते हैं। मई महीने की 19 तारीख को शनि जयंती का उत्सव मनाया जाएगा। आइये जानते हैं कैसे और कहां हुआ था नवग्रहों में कर्म के देवता शनिदेव का जन्म।

स्कंदपुराण के काशीखंड में है जन्म का वर्णन

Shani Jayanti 2023:शनिदेव के जन्म के संबंध में पौराणिक ग्रंथों में अलग-अलग कथाएं मिलती है। शास्त्रोक्त मान्यता के अनुसार शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या को हुआ था ,लेकिन कुछ ग्रंथों में शनिदेव का जन्म भाद्रपद मास की शनि अमावस्या को माना गया है। एक पौराणिक कथा के अनुसार शनिदेव का जन्म ऋषि कश्यप के अभिभावकत्व यज्ञ से हुआ था। वहीं स्कंदपुराण काशीखंड अनुसार शनि भगवान के पिता सूर्य और माता छाया है। शनिदेव की माता छाया का एक नाम संवर्णा भी है।

मनु, यमराज और यमुना है भाई बहन

Shani Jayanti 2023:धार्मिक ग्रंथों में प्रचलित एक कहानी के अनुसार राजा दक्ष की कन्या संज्ञा का विवाह सूर्य देवता के साथ हुआ था। संज्ञा सूर्यदेव के तेज से परेशान रहती थी इसलिये वह सूर्य देव की अग्नि को कम करने का उपाय सोचने लगी। दिन बीतते गए और देवी संज्ञा ने वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना नामक तीन संतानों को जन्म दिया।

बच्चों को जन्म देने के पश्चात देवी संज्ञा ने निश्चय किया कि वह किसी भी तरह से सूर्यदेव के तेज को कम करेंगी। लेकिन बच्चों के पालन-पोषण में दिक्कत ना हौ और सूर्यदेव को इसकी भनक न लगे। इसके लिये उन्होंने एक युक्ति निकाली और अपने तप के बल से अपनी ही तरह की एक महिला को उत्पन्न किया। इस महिला का नाम संवर्णा रखा गया।

तपस्या के लिये संज्ञा वन में गई

Shani Jayanti 2023:यह महिला संज्ञा की छाया की तरह थी इसलिए इनका नाम छाया भी हुआ। संज्ञा ने छाया से कहा कि अब से मेरे बच्चों और पति सूर्यदेव की जिम्मेदारी तुम्हारी रहेगी, लेकिन यह राज केवल मेरे और तुम्हारे बीच ही बना रहना चाहिए। इसके बाद संज्ञा अपने पिता के घर चली गई। उनके पिता को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने बेटी संज्ञा से कहा कि तुमने अच्‍छा नहीं किया तुम पुन: अपने पति के पास लौट जाओ।

पिता के शरण ना देने पर संज्ञा वन में चली गई और घोड़ी का रूप धारण करके तपस्या में लीन हो गई। उधर सूर्यदेव को इस बात का जरा भी आभास नहीं हुआ कि उनके साथ रहने वाली महिला संज्ञा नहीं संवर्णा है। इधर संवर्णा अपने नारीधर्म का पालन करती रही और छाया रूप होने के कारण उन्हें सूर्यदेव के तेज से कोई परेशानी भी नहीं हुई। सूर्यदेव और संवर्णा के संयोग से मनु, शनिदेव और भद्रा (तपती) तीन संतानों का जन्म हुआ।

मां के कठोर तप से शनिदेव हुए काले

Shani Jayanti 2023:मान्यता के अनुसार जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे तब उन्होंने महादेव का कठोर तप किया था। भूख-प्यास, धूप-गर्मी सहने का असर छाया के गर्भ में पल रहे शनिदेव पर भी पड़ा। इसलिये शनिदेव का रंग गर्भ में ही काला हो गया। जन्म के बाद जब सूर्यनारायण ने शनिदेव का रंग काला देखा तो सूर्यदेव को संदेह हुआ कि यह पुत्र तो मेरा नहीं है। उन्होंने इसके लिये छाया पर संदेह करते हुए उन्हें अपमानित किया। मां छाया के तप की शक्ति शनिदेव को भी गर्भ से ही प्राप्त हो गई थी इसलिये क्रोधित होकर अपने पिता सूर्यदेव को देखा तो सूर्यदेव उनकी शक्ति से काले पड़ गए और उनको कुष्ठ रोग हो गया।

महादेव ने सूर्यदेव को करवाया गलती का एहसास

Shani Jayanti 2023:पुत्र शनिदेव के कोप का शिकार होने से सूर्यदेव घबरा गये और भगवान शिव की शरण में पहुंचे। महादेव ने सूर्यदेव की गलतफहमी दूर की और उनकी गलती का अहसास करवाया। सूर्यदेव को अपने किए का काफी पश्चाताप हुआ, उन्होंने क्षमायाचना की तब कहीं उन्हें फिर से अपना असली रूप वापस मिला। किंतु इस घटना के चलते पिता सूर्यदेव और पुत्र शनिदेव के संबंध हमेशा के लिए खराब हो गए।

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